शिया मुसलमानों में गुस्ल (स्नान) कैसे किया जाता है?

प्रश्न विवरण

– क्या शिया लोग मुंह और नाक में पानी डालने को गुस्ल (स्नान) का अनिवार्य हिस्सा नहीं मानते?

उत्तर

हमारे प्रिय भाई,

शिया मुसलमानों में गुस्ल (स्नान) दो तरीकों से किया जा सकता है:



पहला:

क्रमिक स्नान।

यह गुस्ल (स्नान) वही है जो हम सुन्नी मुसलमानों के गुस्ल के रूप में जानते हैं। पहले सिर से नीचे पानी डाला जाता है, फिर दाहिने कंधे से और फिर बाएँ कंधे से पानी डाला जाता है।

दूसरा:

यह इर्तमासी गुस्ल का तरीका है।

इसका मतलब है कि समुद्र या झील में गोता लगाते समय, पूरे शरीर को गीला करने के लिए स्नान करना, ताकि गुस्ल (स्नान) का इरादा पूरा हो सके।

(इस्लामी प्रचार केंद्र)

अहल-ए-सुन्नत में भी गुस्ल (स्नान) में क्रम (तर्तीब) ज़रूरी नहीं है। इसलिए, किसी झील में गोता लगाकर स्नान करना पर्याप्त है।

(देखें: अल-फ़िक़हुल-इस्लामी, खंड १, पृष्ठ ३७३)।

शिया मुसलमानों में मुंह और नाक में पानी देना अनिवार्य नहीं है।

(इस्लामी प्रचार केंद्र)

अहल-ए-सुन्नत के संप्रदायों में से

मालीकी

और

शाफ़ीई मत के अनुसार

मुंह और नाक में पानी डालना भी अनिवार्य नहीं है, बल्कि सुन्नत है।

(देखें: अल-फ़िक़हुल-इस्लामी, खंड १, पृष्ठ ३७३)।


सलाम और दुआ के साथ…

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