प्रश्न विवरण
सलाम वालेकुम…कुछ लोग अपनी आखिरी साँसें लेते समय बेहोश हो जाते हैं, कोमा में चले जाते हैं, उन्हें खुद का होश नहीं रहता। ये लोग अपनी आखिरी साँसों में शहादत नहीं दे पाते…क्या ये लोग आखिरत में बेईमान होकर जाते हैं…या फिर मुसलमान बनकर जीने के कारण मुसलमान बनकर ही मरते हैं?
उत्तर
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सलाम और दुआ के साथ…
इस्लाम धर्म के बारे में प्रश्नोत्तर