क्या आप इस आयत की व्याख्या कर सकते हैं: “अपने रब से माफ़ी मांगो, फिर उसके प्रति पश्चाताप करो…” (हूद 11/3)?

प्रश्न विवरण

“अपने रब से अपने गुनाहों की माफ़ी मांगो और फिर उसी की ओर लौट आओ, पश्चाताप और पछतावे के साथ।” (हूद 11/3) इस आयत का क्या मतलब है? क्या पहले दुआ करनी चाहिए और फिर तौबा करनी चाहिए? क्योंकि हम देखते हैं कि लोग कोई गलती करने पर केवल “استغفر الله” (अस्तागफिरुल्लाह) कहते हैं, लेकिन दुआ, यानी माफ़ी की गुज़ारिश नहीं करते। क्या तौबा करने से पहले माफ़ी की दुआ करना ज़रूरी है? जैसे: “हे अल्लाह, मुझे माफ़ कर दे, और फिर तौबा करनी चाहिए?”

उत्तर

हमारे प्रिय भाई,

यह विषय, इसके उत्तरों और टिप्पणियों सहित, स्थानांतरित कर दिया गया है, पढ़ने के लिए क्लिक करें…


सलाम और दुआ के साथ…

इस्लाम धर्म के बारे में प्रश्नोत्तर

नवीनतम प्रश्न

दिन के प्रश्न